मंगलवार, 1 नवंबर 2011

पशुबलि-कुरबानी , शाकाहार-मांसाहार , वैचारिक बहस, प्रवीण शाह के ११ सवालों के उत्तर निरामिष पर

हमनें मात्र कथनी से ही इस का उत्तर देने की बजाय, करनी से उदाहरण प्रस्तुत करने निर्णय लिया और मात्र बकरीद के दिन ही नहींसाल के 365 दिन जीव-दया को प्रोत्साहन और शाकाहार जाग्रति अभियान को ‘निरामिष’ ब्लॉग के माध्यम से नियमित रूप से चलाया। इस प्रयत्न से हमने यह सिद्ध किया कि हम अहिंसा के सांगोपांग प्रवर्तक हैं और हमें मात्र बकरीद के दिन ही अहिंसा सूझती हो, ऐसा कदापि नहीं है। अहिंसा ही निरामिष का पैगाम हैयह प्रयत्न अनवरत जारी है,  और तब तक जारी रहेगा जब तक लोगों के दिल में करूणा का सागर हिलोरें न लेने लगे।

क्यों इस महाहिंसा का विरोध किया जाता है? सभी 11 प्रश्नों के सार्थक प्रत्युत्तर पढ़ें निरामिष पर

3 टिप्‍पणियां:

  1. अनुराग जी और सुज्ञ जी का ये सम्मिलित प्रयास बार बार पढने और चिंतन-मनन करने योग्य है, मेरा सभी से अनुरोध है अवश्य पढ़ें

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  2. ग्रुप ब्लोग्स की बात की जाए तो ब्लॉग जगत में निरामिष और भारत भारती वैभवं बहुत बेहतरीन कार्य कर रहे हैं |
    मुझे इन दोनों ब्लोग्स में जो सबसे अलग बात लगती है वो ये की इन दोनों ही ब्लोग्स में जिम्मेदार और विचारशील मेम्बर्स योगदान कर रहे हैं |
    इसीलिए परिणाम इस तरह की बेहतरीन पोस्ट्स के रूप में आते है और आगे भी आते रहेंगे |

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