हमनें मात्र कथनी से ही इस का उत्तर देने की बजाय, करनी से उदाहरण प्रस्तुत करने निर्णय लिया और मात्र बकरीद के दिन ही नहीं, साल के 365 दिन जीव-दया को प्रोत्साहन और शाकाहार जाग्रति अभियान को ‘निरामिष’ ब्लॉग के माध्यम से नियमित रूप से चलाया। इस प्रयत्न से हमने यह सिद्ध किया कि हम अहिंसा के सांगोपांग प्रवर्तक हैं और हमें मात्र बकरीद के दिन ही अहिंसा सूझती हो, ऐसा कदापि नहीं है। अहिंसा ही निरामिष का पैगाम है, यह प्रयत्न अनवरत जारी है, और तब तक जारी रहेगा जब तक लोगों के दिल में करूणा का सागर हिलोरें न लेने लगे।
क्यों इस महाहिंसा का विरोध किया जाता है? सभी 11 प्रश्नों के सार्थक प्रत्युत्तर पढ़ें निरामिष पर
क्यों इस महाहिंसा का विरोध किया जाता है? सभी 11 प्रश्नों के सार्थक प्रत्युत्तर पढ़ें निरामिष पर